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अध्याय 120: தனிப்படர் மிகுதி

On Love Married Love अध्याय 120

कुरल 1195

தனிப்படர் மிகுதி

स्थान 5/10

திருக்குறள்

நாம்காதல் கொண்டார் நமக்கெவன் செய்பவோ தாம்காதல் கொள்ளாக் கடை.

Naamkaadhal Kontaar Namakkevan Seypavo Thaamkaadhal Kollaak Katai

“What can our lover do us now If he does not requite our love?”

From him I love to me what gain can be,Unless, as I love him, he loveth me

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कुरल #1195

मौन की पीड़ा

यह कहानी तिरुक्कुरल के उस भाव को दर्शाती है जहाँ प्रेम करने वाला व्यक्ति तब असहाय महसूस करता है जब उसका प्रिय उसे वापस प्रेम नहीं करता। जो मुझे प्रिय है, यदि मैं उसे प्रिय न होऊँ, तो वह मेरा क्या बिगाड़ लेगा?

6–10 yr 1 min