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अध्याय 29: கள்ளாமை

On Virtue Ascetic Virtue अध्याय 29

कुरल 288

கள்ளாமை

स्थान 8/10

திருக்குறள்

அளவறிந்தார் நெஞ்சத் தறம்போல நிற்கும் களவறிந்தார் நெஞ்சில் கரவு.

Alavarindhaar Nenjath Tharampola Nirkum Kalavarindhaar Nenjil Karavu

“Virtue abides in righteous hearts Into minds of frauds deceit darts”

As virtue dwells in heart that 'measured wisdom' gains;Deceit in hearts of fraudful men established reigns

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कुरल #288

मन का दर्पण

कवि की शांति और रोहन की बेचैनी के माध्यम से यह कहानी बताती है कि कैसे बुराई मन में डर और अशांति पैदा करती है। जैसे सदाचारी लोगों के मन में सदाचार बसा होता है, वैसे ही छल करने वालों के मन में छल निवास करता है।

6–10 yr 2 min