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अध्याय 83: கூடா நட்பு

On Wealth & Statecraft The Limbs of Society अध्याय 83

कुरल 829

கூடா நட்பு

स्थान 9/10

திருக்குறள்

மிகச்செய்து தம்மெள்ளு வாரை நகச்செய்து நட்பினுள் சாப்புல்லற் பாற்று.

Mikachcheydhu Thammellu Vaarai Nakachcheydhu Natpinul Saappullar Paatru

“In open who praise, at heart despise Cajole and crush them in friendly guise”

'Tis just, when men make much of you, and then despise,To make them smile, and slap in friendship's guise

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कुरल #829

दोस्ती का मुखौटा

यह कहानी तिरुक्कुरल के उस विचार को दर्शाती है कि जो लोग मित्रता का ढोंग करते हैं लेकिन मन में शत्रुता रखते हैं, उनके प्रति बाहर से सौम्य रहना चाहिए पर उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जो शत्रु बाहर से बहुत मित्रता दिखाते हैं लेकिन मन में तिरस्कार रखते हैं, राजाओं का कर्तव्य है कि वे उनके प्रति बहुत प्रेम दिखाएँ, लेकिन अपने मन में उस प्रेम को समाप्त कर दें।

8–14 yr 2 min