पहाड़ों के पास एक छोटे से गाँव में सोमू नाम का एक मेहनती किसान रहता था। सोमू के पास बहुत सारी भेड़ें थीं। एक सुबह, उसने अपने सबसे प्यारे सफेद मेमने को पास के शहर के बाज़ार में बेचने का फैसला किया।
जब सोमू जंगल के रास्ते से जा रहा था, तो तीन चालाक चोरों ने उसे झाड़ियों के पीछे से देख लिया। वे उस मेमने को चुराना चाहते थे। लेकिन सोमू काफी ताकतवर था, इसलिए वे उसे सीधे चुनौती देने से डर रहे थे। चोरों के सरदार ने एक योजना बनाई, "हम उसे डराकर मेमना ले लेंगे।"
सबसे पहले एक चोर सोमू के पास आया और डरने का नाटक करते हुए चिल्लाया, "अरे बाप रे! आप अपने कंधे पर एक खूंखार भेड़िया लेकर चल रहे हैं! यह आपको काट लेगा, भागिए!" इतना कहकर वह वहाँ से भाग गया। सोमू हैरान था, उसने सोचा, "भेड़िया? यह तो बस एक मेमना है।"
थोड़ी दूर चलने पर दूसरा चोर आया और चिल्लाया, "ओह नहीं! आप अपनी पीठ पर एक जंगली लोमड़ी लेकर जा रहे हैं! यह आप पर हमला कर देगी!" और वह भी डरकर भाग गया। अब सोमू के मन में संदेह होने लगा। "पहले वाले ने भेड़िया कहा, अब यह लोमड़ी कह रहा है। क्या मेरी आँखों में कोई खराबी है?"
तभी तीसरा चोर सोमू के सामने आया और ज़ोर से चिल्लाया, "हे भगवान! आप एक नन्हे बाघ को लेकर चल रहे हैं! यह आपको खा जाएगा!" और वह भी तेज़ी से भाग निकला।
लगातार इन बातों को सुनकर सोमू बुरी तरह घबरा गया। उसे लगा कि शायद इस मेमने में वाकई कोई खतरा है। डर के मारे सोमू ने मेमने को वहीं छोड़ दिया और अपनी जान बचाने के लिए गाँव की ओर भागा। चोरों ने छिपकर यह सब देखा और आसानी से मेमने को चुरा लिया। सोमू को समझ आया कि दूसरों की बातों में आकर उसने अपना विवेक खो दिया था।
Moral
दूसरों की चालाकी भरी बातों में आकर अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना न छोड़ें।