एक समय की बात है, एक सुंदर फूलों के बगीचे में भृंग (beetles) और मधुमक्खियां मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन एक बड़े भूस्खलन के कारण वह बगीचा पूरी तरह नष्ट हो गया। भोजन की तलाश में, दोनों समूहों को एक नए जंगल की ओर निकलना पड़ा।
यात्रा के दौरान, उन्हें एक मजबूत टहनी पर लटका हुआ शहद से भरा एक बहुत बड़ा छत्ता मिला। उस शहद को देखकर दोनों के बीच झगड़ा होने लगा। भृंग चिल्लाए, 'यह शहद हमारा है!' मधुमक्खियां बोलीं, 'नहीं, यह हमारा है!'
तभी वहां एक बुद्धिमान बुजुर्ग भृंग आए। उन्होंने झगड़ा शांत किया और एक चुनौती दी। उन्होंने कहा, 'इस छत्ते को पाने के लिए आप दोनों को एक प्रतियोगिता करनी होगी। आप दोनों को एक छोटा और सुंदर छत्ता बनाना होगा। जो सबसे मजबूत और व्यवस्थित छत्ता बनाएगा, उसे ही यह बड़ा छत्ता इनाम में दिया जाएगा।'
प्रतियोगिता शुरू हुई। भृंगों ने जल्दबाजी में काम किया और उनका छत्ता बहुत ही कमजोर और बेतरतीब बना। लेकिन मधुमक्खियों ने बहुत धैर्य और समझदारी से काम लिया। उन्होंने एक-एक करके छत्ते के कमरों को बहुत ही सुंदर और मजबूत तरीके से बनाया।
जब प्रतियोगिता समाप्त हुई, तो बुद्धिमान बुजुर्ग ने मधुमक्खियों के छत्ते की प्रशंसा की। उन्होंने घोषणा की, 'मधुमक्खियों ने अपनी कुशलता और मेहनत से जीत हासिल की है!' उन्होंने बड़ा छत्ता मधुमक्खियों को दे दिया। भृंगों को समझ आ गया कि जल्दबाजी में किया गया काम कभी सफल नहीं होता।
Moral
कौशल और धैर्य के साथ किया गया कार्य ही सफलता दिलाता है।