एक घने जंगल में एक विशाल बरगद का पेड़ था, जहाँ एक कौवा परिवार खुशी-खुशी रहता था। उस पेड़ पर एक माता, एक पिता और उनके तीन छोटे बच्चे अपना बसेरा बनाए हुए थे।
लेकिन उस पेड़ के नीचे एक बड़ा काला सांप रहता था। एक दिन, जब कौवा माता-पिता भोजन की तलाश में बाहर गए थे, तब उस सांप ने पेड़ के छेद में घुसकर उनके नन्हे बच्चों को खा लिया। जब कौवे वापस लौटे, तो अपने बच्चों को न पाकर वे बहुत रोए। वह दुष्ट सांप वापस अपने बिल में छिप गया।
कुछ समय बाद, कौवों ने फिर से अंडे दिए। लेकिन उस लालची सांप ने फिर से आकर उन अंडों को भी नष्ट कर दिया। कौवे बहुत दुखी और असहाय महसूस कर रहे थे। पास ही रहने वाली एक बुद्धिमान लोमड़ी ने उनका दुख देखा और उनसे बात की। लोमड़ी ने उनकी समस्या सुनी और उन्हें एक चतुर योजना बताई।
लोमड़ी की योजना के अनुसार, कौवों ने एक साहसी काम करने का निर्णय लिया। पास के महल के बगीचे में, एक पहरेदार ने अपनी कीमती सोने की चेन ज़मीन पर छोड़ी थी। माँ कौवे ने चुपके से नीचे उड़ान भरी, चेन को अपनी चोंच में दबाया और तेज़ी से उड़ गई।
"चोर! चोर! पकड़ो उसे!" पहरेदार चिल्लाने लगे और वे कौवे के पीछे दौड़ने लगे। कौवे डर तो रहे थे, लेकिन वे सीधे उस पेड़ की ओर उड़े जहाँ सांप रहता था। जैसे ही वे पेड़ के पास पहुँचे, माँ कौवे ने वह सोने की चेन सीधे सांप के बिल के अंदर गिरा दी।
सोने की चमक देखकर सांप बिल से बाहर निकल आया। उसी समय गुस्से में भरे पहरेदार भी वहाँ पहुँच गए। सांप को सोने की चेन के साथ बाहर निकलते देख, उन्हें लगा कि सांप ही चोर है। पहरेदारों ने तुरंत उस सांप को मार डाला।
सांप के खत्म होने के बाद कौवे बहुत राहत महसूस करने लगे। उन्होंने उस बुद्धिमान लोमड़ी को धन्यवाद दिया जिसने उनकी जान बचाई। उसके बाद से, वे कौवे उस पेड़ पर बिना किसी डर के शांति से रहने लगे।
Moral
बुद्धिमानी और सही योजना से बड़े से बड़े खतरे को भी टाला जा सकता है।