एक समय की बात है, एक बहुत बड़े राज्य में एक बहादुर राजा राज करता था। एक दिन उस राज्य पर बड़ा संकट आ गया। पड़ोसी देश की सेना बहुत शक्तिशाली थी और राजा की सेना उनके मुकाबले बहुत छोटी थी। युद्ध के मैदान में जाने से पहले, सैनिकों के मन में डर और संदेह था। "इतनी बड़ी सेना से हम कैसे जीत पाएंगे? हम तो हार जाएंगे!" सैनिक आपस में फुसफुसा रहे थे।
राजा ने सैनिकों के चेहरों पर डर देखा। उन्होंने तुरंत अपने बुद्धिमान सेनापति को बुलाया। सेनापति समझ गए कि सैनिकों को हथियारों से ज्यादा साहस की जरूरत है।
युद्ध की सुबह, सेनापति ने सभी सैनिकों को इकट्ठा किया। उनके हाथ में एक चमकता हुआ सिक्का था। उन्होंने जोर से कहा, "वीर योद्धाओं, ध्यान से सुनो! मैं इस सिक्के को हवा में उछालने जा रहा हूँ। इसके एक तरफ सूरज है और दूसरी तरफ चाँद। अगर यह सिक्का जमीन पर गिरते समय सूरज की तरफ से ऊपर आता है, तो इसका मतलब है कि आज हमारी जीत निश्चित है!"
सभी सैनिक सांस रोककर सिक्के को देखने लगे। सेनापति ने सिक्का हवा में उछाला। सिक्का हवा में तेजी से घूमा और जब नीचे गिरा, तो सूरज वाला हिस्सा ऊपर था! यह देखकर सैनिकों का डर गायब हो गया और वे खुशी से झूम उठे। "हम जीतेंगे!" के नारों के साथ सैनिक युद्ध के मैदान में कूद पड़े। उनके इसी साहस ने दुश्मन की बड़ी सेना को हरा दिया।
जीत के बाद, राजा ने मुस्कुराते हुए सेनापति से पूछा, "सेनापति, यह जीत तुम्हारी वजह से मिली है। लेकिन मुझे बताओ, वह सिक्का सूरज की तरफ ही क्यों गिरा? तुमने यह कैसे किया?"
सेनापति ने विनम्रता से उत्तर दिया, "महाराज, उस सिक्के के दोनों तरफ सूरज ही बना हुआ था। मैंने केवल सैनिकों का डर दूर करने और उनमें विश्वास जगाने के लिए यह छोटा सा खेल खेला था। असली जीत हथियारों से नहीं, बल्कि मन के विश्वास से मिलती है।"
Moral
आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है।