बहुत समय पहले की बात है, समुद्री डाकुओं का एक गिरोह था जो जहाजों को लूटकर धन इकट्ठा करता था। जब उनके पास बहुत सारा सोना और हीरे जमा हो गए, तो उन्होंने उन्हें छिपाने के लिए एक सुनसान और घने जंगलों वाले द्वीप को चुना। उन्होंने एक छोटी नाव से उस द्वीप पर जाकर जंगल के बीच एक बड़े पेड़ के नीचे खजाना गाड़ दिया और वापस लौट आए।
कुछ समय बाद, वे डाकू पकड़े गए और जेल भेज दिए गए। लेकिन वह खजाना द्वीप पर ही रहा। कई सालों बाद, लियो और सैम नाम के दो साहसी दोस्त उस द्वीप पर पहुँचे। वहाँ उन्हें एक पुराना नक्शा मिला, जिसने उन्हें सीधे खजाने तक पहुँचा दिया। चमकते हुए सोने को देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
तभी उन्हें एक डर सताने लगा। उन्होंने सोचा, 'अगर हम इसे अकेले ले जाने की कोशिश करेंगे, तो कोई हमें पकड़ सकता है या हम मुसीबत में पड़ सकते हैं।' उन्हें समझ आया कि इस खजाने को सुरक्षित तरीके से हासिल करने के लिए कुछ अलग करना होगा।
उन्होंने एक चतुर योजना बनाई। वे पास के गाँवों में गए और अफवाह फैला दी कि 'उस द्वीप पर एक श्राप है! वहाँ पुराने डाकुओं की आत्माएँ आज भी घूमती हैं!'
यह खबर राजा तक पहुँची। राजा खजाना पाना चाहता था, लेकिन वह भी डरना नहीं चाहता था। राजा ने अपने सैनिकों को द्वीप पर भेजा और खजाने के आसपास पुरानी हड्डियाँ और खोपड़ियाँ रखवा दीं ताकि डर सच लगे।
लियो और सैम फिर से द्वीप पर पहुँचे। वहाँ बिखरी हुई हड्डियों को देखकर वे जोर से चिल्लाए, 'देखो! डाकुओं की आत्माएँ सच में यहाँ हैं!' और डरकर वहाँ से भाग गए।
राजा ने इस मौके का फायदा उठाया। उसने अपने सैनिकों के साथ जाकर सारा खजाना सुरक्षित अपने राजकोष में रख लिया। राजा ने उस धन का उपयोग अपने राज्य में स्कूल और अस्पताल बनाने के लिए किया। लियो और सैम अपनी चतुराई से खुश थे कि उनका विचार सबके काम आया।