एक शाम, कविन अपने दादाजी के घर जाने के लिए बस स्टेशन पहुँचने हेतु एक ऑटो में बैठा। ऑटो चालक का नाम मणि था, जो बहुत ही शांत और धैर्यवान व्यक्ति थे।
मणि बहुत ही सावधानी से और यातायात के नियमों का पालन करते हुए ऑटो चला रहे थे। अचानक, एक तेज़ रफ़्तार कार उनके सामने आकर रुक गई। कार चालक की गलती थी कि वह गलत तरीके से बीच में आ गया था, लेकिन वह मणि पर ही चिल्लाने लगा। "अरे ओ ऑटो वाले! क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता? रास्ता क्यों रोक रहे हो!" वह गुस्से में चिल्लाया।
मणि चुपचाप रहे और अपना काम करते रहे। यह देखकर कविन ने पूछा, "अंकल, उन्होंने गलती की है, फिर भी आप गुस्सा क्यों नहीं हुए? वह तो आप पर बहुत चिल्ला रहे हैं!"
मणि ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, "बेटा, कुछ लोगों का मन बहुत अशांत और मैला होता है। वे अपने अंदर की कड़वाहट और गुस्से को दूसरों पर निकालना चाहते हैं। अगर हम उस गुस्से को अपने ऊपर ले लेंगे, तो हमारा मन भी खराब हो जाएगा। इसलिए, उनकी बातों को हवा की तरह जाने देना ही बेहतर है।"
कविन को मणि की बात बहुत समझ आई। मणि ने कविन को सुरक्षित बस स्टेशन पहुँचा दिया।
Moral
दूसरों की कड़वाहट और गुस्से को अपने मन की शांति भंग करने न दें।