एक बड़ी प्रयोगशाला में एक वैज्ञानिक अपने नए आविष्कार पर काम कर रहे थे। एक दिन, उन्होंने अपने सहायक, आर्यन को एक बहुत ही नाजुक उपकरण की जांच करने के लिए बुलाया।
आर्यन ने उत्साह के साथ उस उपकरण को पकड़ा, लेकिन अचानक उसके हाथ से उपकरण फिसल गया और ज़मीन पर गिरकर टूट गया। प्रयोगशाला में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। आर्यन को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और वह अपनी गलती पर बहुत दुखी था। उसे लगा कि अब कोई उस पर भरोसा नहीं करेगा।
अगले दिन, वैज्ञानिक ने रात भर मेहनत करके एक नया उपकरण बनाया। सबको आश्चर्य हुआ जब उन्होंने परीक्षण के लिए फिर से आर्यन को ही बुलाया। अन्य कर्मचारियों ने पूछा, "आप फिर से उसी को क्यों बुला रहे हैं? वह तो लापरवाह है!"
वैज्ञानिक ने मुस्कुराते हुए कहा, "कल एक उपकरण टूटा था, लेकिन आर्यन का हौसला नहीं टूटा। मैंने आज एक नया उपकरण बनाना सीखा है, और मैं चाहता हूँ कि आर्यन भी इस नए मौके से जिम्मेदारी सीखे। गलतियाँ हमें सुधारने का मौका देती हैं।"
आर्यन ने उस मौके का पूरा सम्मान किया और बहुत ही सावधानी और मेहनत से काम करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह वैज्ञानिक का सबसे भरोसेमंद सहायक बन गया।
Moral
गलतियाँ इंसान से ही होती हैं, लेकिन किसी को सुधारने के लिए उसे दूसरा मौका देना सबसे बड़ी सीख है।