एक शांत दोपहर में, माया अपनी बड़ी बहन एलीना के साथ बगीचे में बैठी थी। एलीना एक मोटी किताब पढ़ने में व्यस्त थी, जिससे माया बहुत ऊब रही थी। तभी माया ने एक अजीब नीली मेंढक को एक बड़ी चट्टान की दरार में कूदते हुए देखा।
उत्सुकता में माया उस दरार के पास गई। अचानक, वह दरार बड़ी हो गई और माया उसके अंदर खिंचती चली गई! वह एक जादुई दुनिया में पहुँच गई थी। वहाँ एक छोटी मेज पर एक छोटी शीशी और एक सुनहरी चाबी रखी थी। शीशी पर लिखा था, 'छोटा होने के लिए इसे पिएं।' जैसे ही माया ने उसे पिया, वह एक नन्हीं सी चींटी जितनी छोटी हो गई।
उस सुनहरी चाबी से उसने एक छोटा सा दरवाज़ा खोला। बाहर एक सुंदर बगीचा था, लेकिन वहाँ की घास उसे ऊँचे पेड़ों जैसी लग रही थी। तभी वह नीला मेंढक फिर से आया और आदेश देने लगा, 'अब तुम मेरी सहायक हो! जाओ और मेरे लिए वह बड़ा पत्ता लेकर आओ!' माया को बुरा लगा, लेकिन उसने बात मान ली।
तभी उसे एक जादुई मिठाई मिली। उसे खाते ही माया फिर से बड़ी हो गई और अब वह उस छोटे से बगीचे में समा नहीं पा रही थी। घबराई हुई माया एक जादुई जादूगर की गुफा में पहुँची। जादूगर ने उससे एक पहेली पूछी: 'वह क्या है जो हमेशा आता है पर कभी पहुँचता नहीं?' माया को जवाब नहीं पता था, लेकिन उसने ईमानदारी से कहा, 'मुझे नहीं पता।' उसकी सच्चाई देखकर जादूगर ने उसे बाहर निकलने का रास्ता दिखा दिया।
अंत में, वह एक आलीशान महल में पहुँची जहाँ एक रानी रहती थी। रानी ने उसे एक खेल में चुनौती दी। माया ने हिम्मत से खेला, लेकिन उस नीले मेंढक की वजह से माया हार गई। जैसे ही रानी उसे सजा देने वाली थी, माया को अपनी बहन की आवाज़ सुनाई दी।
'माया, उठो! घर चलने का समय हो गया है,' एलीना ने कहा। माया की आँख खुली तो वह बगीचे में थी। वह सब एक सपना था, लेकिन उस रोमांचक सफर ने उसके मन को खुशियों से भर दिया।
Moral
कल्पना हमें अद्भुत और नई दुनिया की सैर करा सकती है।