एक विशाल और घने जंगल में, राजा वीरन और रानी नीला का शासन था। उनके घर में सिम्बा नाम की एक नन्ही शेरनी ने जन्म लिया। सिम्बा बहुत चुलबुली थी, लेकिन उसकी जिज्ञासा अक्सर उसे मुश्किलों में डाल देती थी। जंगल के बुद्धिमान बंदर, रवि, उसे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते थे।
लेकिन वीरन के भाई, कर्यान, के मन में जलन भरी थी। उसे डर था कि सिम्बा बड़ी होकर रानी बन जाएगी। एक दिन, जब सिम्बा और उसकी सहेली नला (एक हिरणी) खेल रही थीं, कर्यान ने उन्हें चेतावनी दी, "उस अंधेरी घाटी की ओर मत जाना, वहाँ जंगली जानवर रहते हैं।" पर सिम्बा ने उसकी बात अनसुनी कर दी।
सिम्बा और नला घाटी की ओर निकल पड़ीं। अचानक, वहाँ बाघों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। सिम्बा डर के मारे कांपने लगी। तभी वीरन वहाँ पहुँचे और बाघों को भगा दिया। सिम्बा ने रोते हुए अपने पिता से माफी मांगी। वीरन ने उसे समझाया, "असली ताकत बड़ों की बात सुनने और समझदारी दिखाने में है।"
कर्यान ने इस स्थिति का फायदा उठाने की योजना बनाई। उसने सिम्बा को एक चट्टान के पास बुलाया, जहाँ उसने पहले से ही बाघों को उकसा रखा था। जब वीरन सिम्बा को बचाने के लिए आगे बढ़े, तो कर्यान ने उन्हें धक्का देकर गहरी खाई में गिरा दिया। सिम्बा यह देखकर दंग रह गई। कर्यान चिल्लाया, "तुमने अपने पिता को खो दिया, अब यहाँ से भाग जाओ!"
दुखी होकर सिम्बा जंगल छोड़कर चली गई। वहाँ उसे एक खरगोश और एक पक्षी मिले, जिन्होंने उसे जीना सिखाया। कई साल बीत गए और सिम्बा एक शक्तिशाली शेरनी बन गई। उधर, कर्यान के शासन में जंगल बहुत बुरा हाल था। रवि बंदर ने सिम्बा को सच बताया, "सिम्बा, तुम्हारे पिता की मृत्यु तुम्हारी गलती नहीं, कर्यान की साजिश थी।"
सिम्बा हिम्मत जुटाकर अपने घर लौटी। कर्यान ने उस पर झूठा आरोप लगाया, लेकिन सिम्बा डरी नहीं। कर्यान ने बाघों से सिम्बा पर हमला करवाया, लेकिन बाघ कर्यान की क्रूरता से तंग आ चुके थे और उन्होंने कर्यान पर ही हमला कर दिया। नला और अन्य जानवरों ने सिम्बा का साथ दिया। कर्यान हार गया और सिम्बा फिर से जंगल की रानी बनी।
Moral
सच्चाई और साहस हमेशा झूठ और लालच पर विजय प्राप्त करते हैं।