एक घने जंगल में काया नाम की एक कौआ रहती थी। भीषण गर्मी के कारण जंगल के सारे तालाब सूख गए थे। काया को बहुत प्यास लगी थी। पानी की तलाश में भटकते हुए उसे एक पुराने बगीचे में मिट्टी का एक घड़ा मिला। घड़े के तल में थोड़ा पानी था, लेकिन काया की चोंच वहां तक नहीं पहुँच पा रही थी।
काया ने तुरंत अपना फोन निकाला और इंटरनेट पर खोजने लगी कि 'घड़े से पानी कैसे निकालें?' उसने एक वीडियो देखा जिसमें एक कौआ कंकड़ डालकर पानी ऊपर ला रहा था। काया ने सोचा, 'यह तो बहुत मेहनत का काम है!' फिर उसने एक दूसरा वीडियो देखा जिसमें कहा गया था कि सिर्फ सोचने से पानी आ जाएगा। काया रेत पर बैठ गई और आंखें बंद करके पानी के लिए प्रार्थना करने लगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
तभी उसने एक और वीडियो देखा जिसमें डराया जा रहा था कि 'कंकड़ गंदे होते हैं और उनसे बीमारी हो सकती है!' काया डर गई। अचानक बारिश होने लगी, लेकिन फोन पर एक लाइव वीडियो में कहा गया, 'इस बारिश पर भरोसा न करें, इसमें रसायन हो सकते हैं!' काया घबरा गई। तभी उसके फोन पर मैसेज आया कि उसका इंटरनेट डेटा खत्म होने वाला है।
तभी काया की नज़र एक पानी के पंप पर पड़ी। जैसे ही उसने उसे चलाया, पाइप से साफ पानी बहने लगा। काया समझ गई कि इंटरनेट पर देखे गए वे वीडियो केवल अफवाहें और डर फैलाने वाले थे। उसने बिना डरे मजे से पानी पिया और सीखा कि अफवाहों पर नहीं, बल्कि सच्चाई पर भरोसा करना चाहिए।
Moral
अफवाहों पर विश्वास न करें, हमेशा सच्चाई और वास्तविकता की जांच करें।