एक सुंदर जंगल में पक्षियों का मधुर संगीत गूंजता था। उसी जंगल में चीकू नाम का एक छोटा पक्षी रहता था। चीकू का सपना था कि वह जंगल का सबसे बड़ा गायक बने। वह रोज़ अभ्यास करता था, लेकिन उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि कोई उसे सुन ही नहीं पाता था। चीकू बहुत उदास रहता था और सोचता था कि काश उसकी आवाज़ बहुत तेज़ होती।
तभी मोंटू नाम का एक बुद्धिमान बंदर उसके पास आया। मोंटू ने चीकू की परेशानी सुनी और उसे एक मोर के पास ले गया। मोर दिखने में बहुत सुंदर था, लेकिन जब वह बोलता था, तो उसकी आवाज़ बहुत कर्कश और तेज़ थी। मोंटू ने कहा, 'देखो चीकू, मोर की आवाज़ बहुत तेज़ है, लेकिन क्या वह सुनने में मधुर है?'
चीकू ने सिर हिलाया और कहा, 'नहीं मोंटू, मुझे मोर जैसी कर्कश आवाज़ नहीं चाहिए। मेरी आवाज़ भले ही धीमी हो, लेकिन वह मीठी होनी चाहिए।'
मोंटू चीकू की समझदारी से बहुत खुश हुआ। उसने पास के एक बड़े और मज़बूत पत्ते को लिया और उसे एक शंकु (cone) के आकार में मोड़कर चीकू के सामने एक लाउडस्पीकर की तरह रख दिया। मोंटू ने कहा, 'अब गाकर देखो!'
चीकू ने गाना शुरू किया। उस पत्ते की मदद से उसकी मीठी आवाज़ दूर-दूर तक पहुँचने लगी। जंगल के सभी पक्षी चीकू का मधुर गीत सुनने के लिए इकट्ठा हो गए। चीकू बहुत खुश था। मोंटू ने मुस्कुराते हुए कहा, 'याद रखना चीकू, समस्या आने पर खुद को बदलने की ज़रूरत नहीं है, बस समस्या को सुलझाने का एक नया और समझदारी भरा तरीका ढूँढना चाहिए।'
Moral
बुद्धिमानी से काम लेने पर हर समस्या का समाधान मिल जाता है।