एक छोटे से शहर में कविन नाम का एक लड़का रहता था। कविन की एक बुरी आदत थी—वह हर समय अपने मोबाइल फोन में डूबा रहता था। उसे बाहर खेलना या प्रकृति को देखना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसके माता-पिता इस बात से बहुत परेशान रहते थे। वे उसे समझाते, पर कविन पर कोई असर नहीं होता था।
एक दिन, उसके पिता उसके लिए कुछ ज्ञानवर्धक किताबें लेकर आए। पहले तो कविन ने चिढ़ते हुए कहा, "मुझे इनकी ज़रूरत नहीं है," लेकिन धीरे-धीरे उसने किताबें पढ़ना शुरू किया। किताबों की कहानियों और विज्ञान की दुनिया ने उसे मंत्रमुग्ध कर दिया। उसने मोबाइल देखना कम कर दिया और पढ़ने का शौक पाल लिया।
एक सुबह, जब पूरा परिवार पिकनिक पर जाने की तैयारी कर रहा था, अचानक कार स्टार्ट नहीं हुई। उसके पिता ने बहुत कोशिश की, लेकिन कार नहीं चली। पिता ने हार मानकर कहा, "कल मैकेनिक को बुलाना पड़ेगा, आज का प्लान रद्द है।"
तभी कविन ने कार की मैनुअल बुक उठाई। उसने अपनी पढ़ी हुई किताबों से सीखी गई समझ का इस्तेमाल किया और मैनुअल में दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ा। उसने देखा कि एक छोटा सा बटन सही जगह पर नहीं था। उसने सावधानी से उसे ठीक किया।
पिता ने जैसे ही चाबी घुमाई, कार तुरंत स्टार्ट हो गई! कविन की बुद्धिमानी देखकर सब हैरान रह गए। उसके माता-पिता को इस बात का गर्व था कि किताबों ने उसके सोचने के तरीके को बदल दिया है।
Moral
पढ़ने की आदत हमें जीवन की मुश्किलों को सुलझाने का कौशल सिखाती है।