नीली पहाड़ियों के घने जंगल में सिम्बा नाम का एक छोटा बाघ पैदा हुआ। अन्य बाघों की तरह उसकी दहाड़ दमदार नहीं थी, बल्कि उसकी आवाज़ बहुत ही अजीब और फटी हुई सी थी। जब भी सिम्बा कुछ बोलने या दहाड़ने की कोशिश करता, जंगल के दूसरे जानवर उसका मज़ाक उड़ाते। "देखो, इस बाघ की आवाज़ तो सूखी पत्तियों जैसी है!" बंदर और हिरण उसका मज़ाक उड़ाते थे। इस कारण सिम्बा बहुत उदास रहने लगा और अकेला हो गया।
एक दिन, जंगल के एक बुद्धिमान बूढ़े भालू ने सिम्बा को उदास देखा। सिम्बा ने रोते हुए कहा, "मेरी आवाज़ बहुत खराब है, मैं कभी किसी काम का नहीं हो पाऊंगा।" भालू ने प्यार से समझाया, "सिम्बा, हर किसी में कोई न कोई खास गुण होता है। तुम्हारी यह अनोखी आवाज़ तुम्हारी कमजोरी नहीं, बल्कि तुम्हारी ताकत बन सकती है। बस खुद पर भरोसा रखो।"
कुछ दिनों बाद, शेर राजा को जंगल के सभी जानवरों तक एक ज़रूरी संदेश पहुँचाना था। जंगल इतना बड़ा था कि संदेश पहुँचाना मुश्किल हो रहा था। तब भालू ने सिम्बा को एक सुझाव दिया, "सिम्बा, तुम्हारी आवाज़ की गूँज बहुत दूर तक जाती है। अगर तुम उस ऊँची चट्टान पर खड़े होकर चिल्लाओगे, तो तुम्हारी आवाज़ जंगल के आखिरी कोने तक पहुँचेगी।"
सिम्बा ने हिम्मत जुटाई और ऊँची चट्टान पर चढ़ गया। उसने राजा का संदेश सुनाना शुरू किया। उसकी वह अनोखी और भारी आवाज़ पूरे जंगल में गूँज उठी। दूर बैठे जानवर भी उसे साफ सुन पा रहे थे। सब हैरान थे कि सिम्बा की आवाज़ कितनी प्रभावशाली है।
तभी अचानक जंगल के एक हिस्से में भीषण आग लग गई। सभी जानवर डरकर भागने लगे। सिम्बा तुरंत ऊँची चट्टान पर गया और अपनी पूरी ताकत से चिल्लाया, "हाथियों! जल्दी आओ! आग फैल रही है!" उसकी वह खास आवाज़ सुनकर दूर खड़े हाथी तुरंत वहाँ पहुँच गए। उन्होंने अपनी सूंड में पानी भरकर आग बुझाई। सिम्बा की सूझबूझ से पूरा जंगल बच गया। शेर राजा ने सिम्बा को वीरता का पदक दिया और उसे जंगल का आधिकारिक संदेशवाहक नियुक्त किया। सिम्बा ने समझ लिया कि उसकी कमी ही उसकी सबसे बड़ी खूबी थी।
Moral
आपकी विशिष्टता ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है।