एक गाँव में एक किसान का बड़ा अनाज भंडार था। किसान अपनी मेहनत से उगाया हुआ अनाज वहाँ सुरक्षित रखता था। लेकिन चूहों की एक टोली ने उस भंडार पर कब्ज़ा कर लिया था। चूहे न केवल अनाज खाते थे, बल्कि बोरियों को भी कुतर देते थे। किसान अपनी मेहनत बर्बाद होते देख बहुत दुखी था।
चूहों से छुटकारा पाने के लिए किसान एक फुर्तीली बिल्ली ले आया। बिल्ली के आते ही चूहे डरकर छिपने लगे। चूहों का सरदार, चीकू, बहुत समझदार था। उसने सोचा कि बिल्ली से लड़ने के बजाय उसे बुद्धिमानी से हराना चाहिए।
एक दिन जब बिल्ली पास ही सो रही थी, चीकू ने ज़ोर-ज़ोर से बोलना शुरू किया ताकि बिल्ली सुन सके। "दोस्तों, क्या आपने देखा? इस बिल्ली का सपना एक विशाल जंगली जानवर बनने का है! यह सोचती है कि अगर यह रोज़ सिर्फ ये स्वादिष्ट अनाज खाएगी, तो यह बहुत बड़ी और शक्तिशाली हो जाएगी!"
बिल्ली ने यह सुना और पास आकर पूछा, "क्या यह सच है? क्या मैं सच में एक बड़ी जानवर बन सकती हूँ?"
चीकू ने चालाकी से कहा, "हाँ! बस हमें पकड़ना छोड़ दो और रोज़ ढेर सारा अनाज खाओ। तुम जितना ज़्यादा अनाज खाओगी, उतनी ही बड़ी होती जाओगी!" लालच में आकर बिल्ली ने चूहों का शिकार करना छोड़ दिया और सारा दिन अनाज खाने में बिताने लगी। सिर्फ अनाज खाने के कारण बिल्ली बहुत मोटी और भारी हो गई। अब वह इतनी सुस्त हो गई थी कि न तो दौड़ सकती थी और न ही चूहों को पकड़ सकती थी।
भूख लगने पर बिल्ली ने और भी अनाज खाना शुरू कर दिया, जिससे किसान का सारा भंडार खत्म होने लगा। जब किसान ने देखा कि बिल्ली अनाज बर्बाद कर रही है, तो उसने उसे डाँटकर बाहर निकाल दिया। चीकू की चतुराई से सभी चूहे बच गए।