एक घने और हरे-भरे जंगल में, पाँच प्यारे नन्हे खरगोश और उनकी माँ एक सुरक्षित बिल में रहते थे। खरगोश बहुत शरारती थे, लेकिन वे हमेशा अपनी माँ की बात मानते थे और सुरक्षित स्थान पर ही खेलते थे।
एक दिन, माँ खरगोश भोजन की तलाश में बाहर जा रही थी। जाने से पहले उसने चेतावनी दी, "मेरे बच्चों, जब तक मैं न आ जाऊँ, किसी के लिए भी दरवाज़ा मत खोलना।" माँ के जाते ही, एक चालाक लोमड़ी, जो काफी समय से उन पर नज़र रख रही थी, वहाँ आ पहुँची। लोमड़ी ने पहले माँ खरगोश की आवाज़ निकालने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज़ बहुत भारी और कर्कश थी। खरगोश चिल्लाए, "यह माँ की आवाज़ नहीं है! जाओ लोमड़ी!"
Moral
बुराई करने वालों का अंत हमेशा बुरा ही होता है।