ज्ञान के एक महान संस्थान में, एक विद्वान को सर्वोच्च सम्मान देने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इस सम्मान को पाने के लिए, उन्हें अपनी बुद्धि और भाषा के ज्ञान की एक कठिन परीक्षा से गुजरना था।
तीन अनुभवी प्रोफेसर एक शांत कक्ष में बैठकर उनका साक्षात्कार लेने के लिए तैयार थे। विद्वान बहुत ही शांत और आत्मविश्वास के साथ कमरे में आए। प्रोफेसरों ने उनके कार्यों की प्रशंसा की, लेकिन अंत में उन्होंने उनकी बुद्धिमत्ता परखने के लिए एक चुनौती पेश की।
एक प्रोफेसर ने एक अजीब सवाल पूछा, "क्या आप एक ऐसा अंग्रेजी वाक्य बना सकते हैं जिसमें 'because' शब्द लगातार तीन बार आए?"
कमरे में सन्नाटा छा गया। विद्वान ने बिना घबराए, एक हल्की मुस्कान के साथ विचार किया और बहुत ही स्पष्टता से उत्तर दिया।
"नहीं सर, ऐसा करना संभव नहीं है। क्योंकि कोई भी वाक्य 'because' से शुरू या समाप्त नहीं होता है, क्योंकि 'because' केवल एक संयोजक (conjunction) है जो शब्दों को जोड़ता है!"
उनका यह तर्कपूर्ण और सटीक उत्तर सुनकर प्रोफेसर दंग रह गए। उन्होंने देखा कि विद्वान को केवल शब्दों का ज्ञान ही नहीं था, बल्कि भाषा के व्याकरण की भी गहरी समझ थी। उनकी इस विद्वत्ता से प्रसन्न होकर, संस्थान ने उन्हें वह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया।
Moral
गहरा ज्ञान और स्पष्ट सोच ही सच्ची बुद्धिमत्ता की पहचान है।