एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही प्यारा और ऊर्जावान लड़का था, लेकिन पढ़ाई में उसका मन कम ही लगता था। उसे स्कूल की बातें समझने में काफी कठिनाई होती थी।
उसकी माँ उसकी क्षमता को समझती थीं। उन्होंने अर्जुन को सही दिशा दिखाने के लिए तीन नियम बनाए। एक शाम, माँ ने उससे कहा, "अर्जुन, अगर तुम जीवन में सफल होना चाहते हो, तो तुम्हें ये तीन बातें माननी होंगी: पहला, अपना होमवर्क पूरा करने के बाद ही खेलना। दूसरा, हफ्ते में केवल दो बार ही टीवी देखना। और तीसरा, हर महीने एक नई किताब पढ़ना और उसमें से सीखी हुई सबसे अच्छी बात को एक डायरी में लिखना।"
शुरुआत में अर्जुन को यह थोड़ा मुश्किल लगा। जब उसके दोस्त बाहर खेल रहे होते, तो उसका भी मन करता था। लेकिन उसने अपनी माँ का अनुशासन बनाए रखा। जैसे-जैसे वह किताबें पढ़ने लगा, उसे दुनिया की नई-नई बातें पता चलने लगीं।
एक दिन स्कूल में शिक्षक ने एक बहुत ही कठिन सवाल पूछा। पूरी कक्षा में सन्नाटा छा गया, किसी को उत्तर नहीं पता था। लेकिन अर्जुन ने अपनी पढ़ी हुई किताबों को याद किया और आत्मविश्वास के साथ सही उत्तर दे दिया। शिक्षक उसकी बुद्धिमानी देखकर दंग रह गए।
उस दिन अर्जुन को समझ आया कि किताबें ही असली खजाना हैं। उसने लाइब्रेरी जाकर और भी किताबें पढ़ना शुरू कर दिया। समय बीता और वही छोटा अर्जुन बड़ा होकर एक बहुत प्रसिद्ध डॉक्टर बना। उसकी सफलता का राज वही अनुशासन और पढ़ने की आदत थी।
Moral
अनुशासन और पढ़ने की आदत ही सफलता की असली कुंजी है।