एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक किसान रहता था। उसकी पत्नी मीरा बहुत ही सरल और गुणवान स्त्री थी। अर्जुन मेहनती था, लेकिन कभी-कभी लालच और कठिन परिस्थितियों में वह गलत निर्णय ले लेता था। एक बार एक व्यापारी ने उसे सुझाव दिया, 'अपना खेत बेच दो और शहर जाकर बड़ा व्यापार शुरू करो।' अर्जुन दुविधा में था।
मीरा ने उसे रोका नहीं, बस इतना कहा, 'अर्जुन, धन से बड़ा हमारा चरित्र होता है। आप जो भी करें, वह हमारे परिवार के सम्मान को कम न करे।'
अर्जुन शहर चला गया और व्यापार करने लगा। एक समय ऐसा आया जब उसे एक धोखेबाज तरीके से बहुत सारा मुनाफा कमाने का मौका मिला। वह लालच में आने ही वाला था कि उसे मीरा की बातें और उसके उच्च संस्कार याद आ गए। उसे अहसास हुआ कि अगर उसने ईमानदारी खो दी, तो वह सब कुछ खो देगा। उसने ईमानदारी का रास्ता चुना। मीरा के गुणों ने अर्जुन को एक महान इंसान बना दिया। उसे समझ आ गया कि यदि पत्नी गुणवान है, तो उसके पास जीवन की हर खुशी और सफलता है।