एक शांत गाँव में कार्तिक और रोहन नाम के दो मित्र रहते थे। कार्तिक बहुत ही संयमी और शिष्ट स्वभाव का था। रोहन थोड़ा चंचल था और अक्सर दूसरों की मर्यादा का ध्यान नहीं रखता था। एक बार, माधव अपनी पत्नी मीरा के साथ उस गाँव में रहने आया। मीरा एक बहुत ही सरल और सम्मानित महिला थी।
रोहन ने देखा कि मीरा बहुत दयालु है, और वह उसे प्रभावित करने के लिए बार-बार उसके पास जाने लगा। यहाँ तक कि माधव की मौजूदगी में भी, रोहन मीरा से बात करने के बहाने ढूँढता था। कार्तिक ने यह देखा और रोहन को समझाया, 'रोहन, किसी की प्रशंसा करना गलत नहीं है, लेकिन मीरा एक विवाहित स्त्री है। उसके और माधव के रिश्ते का सम्मान करना ही तुम्हारी असली महानता है। दूसरों के घर की मर्यादा में दखल देना तुम्हारे चरित्र को छोटा बनाता है।'
रोहन ने पहले तो बात अनसुनी कर दी, लेकिन कुछ दिनों बाद जब उसने फिर से मीरा का ध्यान खींचने की कोशिश की, तो उसे कार्तिक की बात याद आई। उसे महसूस हुआ कि उसका व्यवहार केवल 'मजाक' नहीं, बल्कि एक परिवार के विश्वास के साथ खिलवाड़ था। रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने समझ लिया कि एक सच्चा और सम्मानित व्यक्ति वही है जो दूसरों के वैवाहिक जीवन का सम्मान करता है।