एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही दयालु था, लेकिन दूसरों की बातों में जल्दी आ जाता था। उसके पिता एक ईमानदार किसान थे। एक दिन, जब कविन अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, तभी रवि नाम का एक नया लड़का वहाँ आया। रवि देखने में बहुत चुलबुला था, लेकिन उसे दूसरों को परेशान करने और गलत काम करने की आदत थी।
रवि ने कविन से कहा, 'चलो कविन, हम उस बगीचे में चलते हैं और चुपके से फल चुराते हैं, किसी को पता नहीं चलेगा!' कविन को पहले तो डर लगा, लेकिन रवि के कहने पर वह मान गया। रवि की संगति में रहकर कविन ने पढ़ाई पर ध्यान देना छोड़ दिया और झूठ बोलना शुरू कर दिया। एक दिन, रवि के साथ मिलकर शरारत करते हुए कविन पकड़ा गया। जब उसने अपने पिता की आँखों में निराशा देखी, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझ लिया कि अच्छे दोस्त जीवन को ऊँचा उठाते हैं, जबकि बुरे दोस्त जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं।