एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे पेड़-पौधों से बहुत लगाव था। एक दिन गाँव में एक बड़ा मेला लगने वाला था। अर्जुन ने सोचा कि वह मेले के लिए अपने बगीचे में बहुत सुंदर फूल उगाएगा और उन्हें बेचेगा। वह बहुत उत्साहित था, इसलिए उसने तुरंत बीज खरीदे और उन्हें मिट्टी में डाल दिया।
लेकिन अर्जुन ने बहुत जल्दबाजी की। उसने यह नहीं सोचा कि मिट्टी कैसी होनी चाहिए या पौधों को कितने पानी की ज़रूरत है। कुछ ही दिनों में पौधे मुरझाने लगे। अर्जुन बहुत दुखी हुआ और रोने लगा। 'ऐसा क्यों हो रहा है?' उसने सोचा।
तभी उसके दादाजी, सोमू, उसके पास आए। उन्होंने कहा, 'अर्जुन, कोई भी काम करने से पहले, जो लोग उस काम को जानते हैं, उनसे सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।' दादाजी की बात मानकर अर्जुन गाँव के अनुभवी माली, रवि के पास गया। रवि ने उसे प्यार से समझाया कि मिट्टी को कैसे तैयार करना है और पौधों की देखभाल कैसे करनी है।
अर्जुन ने रवि की हर बात मानी। उसने सही तरीके से मिट्टी तैयार की और पौधों को सही समय पर पानी दिया। कुछ ही हफ्तों में उसका बगीचा रंग-बिरंगे फूलों से भर गया। मेले में अर्जुन के फूलों की बहुत मांग हुई और उसने बहुत सफलता पाई। उसने समझ लिया कि सोच-समझकर और सही सलाह से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।