एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। अर्जुन को बागवानी का बहुत शौक था। एक दिन, दादाजी ने उसे एक छोटा सा पौधा दिया और कहा, "अर्जुन, इसकी देखभाल करना। लेकिन याद रखना, पौधे को पानी कब देना है और खाद कब डालनी है, यह सब सही समय (timing) पर निर्भर करता है।"
कुछ दिनों बाद, आसमान में काले बादल छाए हुए थे। अर्जुन ने सोचा, "शायद आज बारिश हो जाए, इसलिए मुझे अभी पानी देने की ज़रूरत नहीं है।"
लेकिन बारिश नहीं हुई। इसके बजाय, बहुत तेज़ गर्मी पड़ने लगी। दोपहर तक अर्जुन ने देखा कि उसका नन्हा पौधा मुरझाने लगा है। वह घबरा गया और तुरंत दौड़कर पानी लाया और पौधे को सींचा।
दादाजी ने उसे समझाते हुए कहा, "अर्जुन, बारिश का इंतज़ार करना बुरा नहीं था, लेकिन जब पौधे को प्यास लगी, तब तुम्हें तुरंत कदम उठाना चाहिए था। सही समय पर किया गया कार्य ही सफलता को थामे रखता है।"
अर्जुन समझ गया कि परिस्थितियों और समय को देखकर काम करना कितना ज़रूरी है। उस दिन के बाद से, वह हमेशा समय का ध्यान रखकर अपने बगीचे की देखभाल करने लगा।