एक सुंदर पहाड़ी गाँव में इलंगोवन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता गाँव के मुखिया थे। एक बार गाँव में एक बड़ा उत्सव मनाया जाना था। उत्सव की तैयारियों और कामों को बाँटने की जिम्मेदारी इलंगोवन को दी गई।
शुरुआत में, इलंगोवन ने सोचा कि वह अपने सबसे अच्छे दोस्त कधिर को ही सारे काम सौंप देगा। लेकिन उसके पिता ने समझाया, 'बेटा, किसी को भी चुनने से पहले उसकी काबिलियत को अच्छी तरह देख लो। और एक बार जब तुम किसी को चुन लो, तो उसे वही काम दो जिसमें वह माहिर हो, और उस पर पूरा भरोसा रखो।'
इलंगोवन ने इस बात पर गौर किया। उसने देखा कि कधिर बहुत फुर्तीला है और खेल-कूद में माहिर है, लेकिन वह चीजों को सहेज कर रखने में थोड़ा लापरवाह है। इसलिए, इलंगोवन ने कधिर को खेल प्रतियोगिता का प्रभारी बना दिया। वहीं, नीला नाम की एक शांत और समझदार लड़की थी, जिसे उसने उत्सव के सामान की देखभाल का काम सौंपा। नीला बहुत ही जिम्मेदार थी।
उत्सव बहुत ही शानदार रहा। कधिर ने जोश के साथ खेल आयोजित किए और नीला ने सारा सामान सुरक्षित रखा। इलंगोवन ने सही व्यक्ति को सही काम दिया था, इसलिए उत्सव बिना किसी परेशानी के संपन्न हुआ।