चंद्रपुर नामक एक समृद्ध राज्य में विक्रम नाम का एक राजा राज करता था। वह अपनी प्रजा की भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहता था। एक बार, सोमनाथ नाम के एक शक्तिशाली व्यापारी ने रवि नाम के एक गरीब किसान की उपजाऊ जमीन हड़पने की कोशिश की। सोमनाथ बहुत प्रभावशाली था, इसलिए कोई भी उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
जब रवि अपनी शिकायत लेकर राजा के पास आया, तो विक्रम के सामने एक बड़ी चुनौती थी। वह जानता था कि यदि वह व्यापारी का साथ देता है, तो प्रजा का विश्वास टूट जाएगा। विक्रम ने मामले की गहराई से जांच करवाई। अंत में, यह साबित हो गया कि सोमनाथ ने धोखाधड़ी की थी। राजा ने रवि को उसकी जमीन वापस दिलाई और व्यापारी को दंडित किया।
राजा के न्याय की चर्चा चारों ओर फैल गई। वर्षों बाद, जब राज्य पर एक बड़ा संकट आया, तो प्रजा ने राजा का साथ नहीं छोड़ा। क्योंकि वे जानते थे कि उनका राजा न्यायप्रिय है, इसलिए उन्होंने राजा की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। जिस तरह राजा ने न्याय के माध्यम से प्रजा की रक्षा की थी, उसी तरह राजा के न्याय ने राजा की रक्षा की।