एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का अपने पिता के साथ रहता था। उसके पिता की एक छोटी सी किराने की दुकान थी। एक दिन, आर्यन एक बड़ी दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था। जीतने वाले को एक शानदार साइकिल इनाम में मिलने वाली थी।
प्रतियोगिता से एक हफ्ते पहले, आर्यन के दोस्त रोहन ने एक चाल चली। रोहन ने कठिन अभ्यास से बचने के लिए झूठ बोला और दिखावा किया कि वह बहुत तेज़ दौड़ता है। आर्यन ने यह देखा और एक पल के लिए सोचा, 'क्या मुझे भी ऐसा ही करना चाहिए?' लेकिन उसे अपने पिता की बात याद आई: 'दूसरों को दुख पहुँचाकर जो हासिल किया जाता है, वह आँसुओं के साथ चला जाता है। लेकिन ईमानदारी से किया गया काम, भले ही शुरू में नुकसान लगे, बाद में बहुत फल देता है।'
प्रतियोगिता के दिन, रोहन अपनी चालाकी से सबसे आगे निकल गया। लेकिन दौड़ के बीच में ही उसकी चोरी पकड़ी गई और उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। रोहन बहुत रोया। आर्यन ने पूरी मेहनत से दौड़ लगाई। वह उस दिन प्रथम नहीं आया और उसे साइकिल भी नहीं मिली, जिससे वह थोड़ा उदास था। लेकिन कुछ महीनों बाद, गाँव के खेल क्लब ने आर्यन की ईमानदारी और मेहनत को देखा। उन्होंने आर्यन को एक छात्रवृत्ति और एक नई साइकिल उपहार में दी। आर्यन समझ गया कि ईमानदारी का रास्ता ही असली जीत है।