प्राचीन काल में धर्मपुरी नाम का एक समृद्ध राज्य था। वहाँ के राजा विक्रम बहुत दयालु थे, लेकिन युद्ध की रणनीतियों में उन्हें महारत हासिल नहीं थी। उनके पास धर्म नाम के एक बहुत ही बुद्धिमान मंत्री थे।
एक बार पड़ोसी राज्य के राजा ने धर्मपुरी पर हमला करने की योजना बनाई। मंत्री धर्म ने इस खतरे को भांप लिया और राजा से कहा, 'महाराज, हमें तुरंत अपनी किलेबंदी मजबूत करनी चाहिए और सैनिकों को तैयार करना चाहिए।' राजा थोड़े संकोच में थे और उन्होंने निर्णय लेने में देरी की।
लेकिन धर्म ने हार नहीं मानी। उन्होंने केवल सलाह ही नहीं दी, बल्कि उसे लागू करने की पूरी योजना भी बना ली। उन्होंने अनाज के भंडार, हथियारों की मरम्मत और सुरक्षा के हर छोटे-बड़े पहलू का ध्यान रखा। मंत्री के समर्पण को देखकर राजा ने अंततः उनकी बात मान ली।
जब दुश्मन ने हमला किया, तो राज्य पूरी तरह तैयार था। राजा विक्रम की वीरता और मंत्री धर्म की सटीक योजना ने दुश्मन को खदेड़ दिया। इस जीत के बाद, प्रजा ने न केवल राजा का सम्मान किया, बल्कि यह भी माना कि इस महान विजय के पीछे मंत्री धर्म की बुद्धिमानी और उनके काम के प्रति दृढ़ता थी।