एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसे बागवानी का बहुत शौक था। एक दिन, उसने अपने छोटे से बगीचे में एक बड़ा सूरजमुखी का पौधा उगाने का फैसला किया। उत्साह में आकर, कविन ने तुरंत बीज बो दिए और पानी डालने लगा। लेकिन, जल्दबाजी में उसने यह नहीं देखा कि उसके पास पर्याप्त बीज थे या नहीं। उसने खराब मिट्टी का इस्तेमाल किया और दोपहर की तेज धूप में काम शुरू कर दिया जब जमीन बहुत सख्त थी।
कुछ ही दिनों में, नन्हा पौधा मुरझाने लगा। कविन दुखी होकर अपने दादाजी के पास गया। दादाजी ने प्यार से समझाया, 'कविन, कोई भी काम शुरू करने से पहले पाँच चीजों के बारे में सोचना चाहिए: क्या तुम्हारे पास पर्याप्त साधन (पैसा/बीज) हैं? क्या तुम्हारे पास सही औज़ार हैं? क्या यह सही समय है? क्या तुम्हें काम करने का सही तरीका पता है? और क्या वह जगह सही है?'
कविन को अपनी गलती समझ आ गई। अगली बार, उसने पूरी तैयारी की। उसने अच्छे बीज और खाद के लिए पैसे बचाए। उसने सही बागवानी के औज़ार जुटाए। उसने बारिश के मौसम का सही समय चुना। उसने सही तरीके से पानी दिया। कुछ ही महीनों में, उसका बगीचा सुनहरे सूरजमुखी के फूलों से भर गया।