अर्जुन अपने दादाजी के साथ एक पुराने किले को देखने गया था। किले की ऊँची दीवारों को देखकर उसने पूछा, "दादाजी, क्या सिर्फ ऊँची दीवारें होने से किला सुरक्षित हो जाता है?"
दादाजी मुस्कुराए और बोले, "नहीं अर्जुन, किला सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं होता। देखो, इन ऊँचे पहाड़ों को, जो दुश्मन से रक्षा करते हैं। देखो इस बहते हुए साफ पानी को, जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते। ये खुले मैदान हमें दूर से आने वाले खतरों की खबर देते हैं, और ये घने छायादार जंगल हमें भोजन और ठंडक देते हैं।"
अर्जुन समझ गया कि एक किले की असली ताकत उसकी दीवारों में नहीं, बल्कि पानी, जमीन, पहाड़ और जंगलों के मेल में होती है। बिना इन प्राकृतिक संसाधनों के, कोई भी किला अधूरा है।