एक सुंदर पहाड़ी गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक बड़े किले के रक्षक थे। एक दिन, पड़ोसी देश के एक शक्तिशाली राजा ने अपनी विशाल सेना के साथ उस किले को घेर लिया। किले की दीवारें बहुत ऊँची और मज़बूत थीं, लेकिन किले के अंदर रहने वाले लोग डर गए और आपस में लड़ने लगे।
अर्जुन के पिता ने सबको इकट्ठा किया और कहा, 'किला सिर्फ पत्थरों से नहीं बनता, बल्कि उसके अंदर रहने वाले लोगों की एकता से बनता है। अगर हम साथ खड़े रहे, तो कोई हमें हरा नहीं पाएगा।' उनकी बात सुनकर लोगों ने आपस में लड़ना बंद कर दिया और एक टीम की तरह काम करने लगे। उन्होंने भोजन और पानी का प्रबंध किया और एक-दूसरे की मदद की। दुश्मन की सेना कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, किले के अंदर के लोग एकजुट होकर डटे रहे। उनकी हिम्मत और एकता देखकर दुश्मन थक गया और वापस लौट गया। किला अपनी दीवारों की वजह से नहीं, बल्कि अपने लोगों के साहस की वजह से जीत गया।