एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही दयालु था, लेकिन उसकी एक कमी थी—वह बिना सोचे-समझे तुरंत दोस्त बना लेता था। एक दिन स्कूल में उसकी मुलाकात रवि नाम के एक नए लड़के से हुई। रवि बहुत ही मीठा बोलने वाला और आकर्षक लड़का था। देखते ही देखते वे दोनों पक्के दोस्त बन गए।
कुछ दिनों बाद, कविन एक ज़रूरी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। तभी रवि उसके पास आया और बोला, 'कविन, क्या तुम मुझे आज रात के लिए अपनी किताबें दे सकते हो? मैं कल पक्का लौटा दूँगा।' कविन ने उस पर भरोसा करके किताबें दे दीं। लेकिन अगले दिन रवि किताबें लेकर नहीं आया। इतना ही नहीं, कविन को पता चला कि रवि दूसरे बच्चों से कविन के बारे में गलत बातें कर रहा था।
कविन बहुत दुखी हुआ और अपने दादाजी के पास गया। दादाजी ने समझाया, 'कविन, किसी को दोस्त बनाने से पहले उसके स्वभाव, उसके परिवार के संस्कारों और उसकी कमियों को अच्छी तरह जान लेना चाहिए। जल्दबाजी में की गई दोस्ती नुकसान पहुँचा सकती है।'
कविन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने रवि के व्यवहार को ध्यान से देखा और समझा कि वह स्वार्थी और धोखेबाज़ है। इसके बाद, कविन ने आदित्य नाम के एक ईमानदार लड़के से दोस्ती की। आदित्य एक सच्चा दोस्त साबित हुआ और हमेशा कविन का साथ दिया।