एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत प्रतिभाशाली था, लेकिन उसकी दो बड़ी कमियाँ थीं: उसे अपने गुस्से पर काबू पाना नहीं आता था और वह अपने राज़ नहीं छुपा पाता था। जब भी कुछ गलत होता, वह चिल्लाने लगता और बात-बात पर अपने मन की सारी बातें दूसरों को बता देता था।
एक बार गाँव में तीरंदाजी की एक बड़ी प्रतियोगिता हुई। अर्जुन उसे जीतना चाहता था। उसके दोस्त कविन ने उसे जीतने के लिए एक खास तरकीब बताई। लेकिन अभ्यास के दौरान जब अर्जुन से निशाना चूक गया, तो वह अपना आपा खो बैठा और गुस्से में चिल्लाने लगा। चिल्लाते-चिल्लाते उसने अपनी घबराहट और अपनी योजना भी सबके सामने बोल दी।
बाकी प्रतियोगियों ने अर्जुन के गुस्से और उसकी बातों से उसकी कमजोरी समझ ली। प्रतियोगिता के दौरान, जब अर्जुन को थोड़ा सा भी उकसाया गया, तो वह फिर से गुस्से में आ गया और अपना ध्यान खो बैठा। इस तरह वह प्रतियोगिता हार गया। अर्जुन को समझ आया कि जो व्यक्ति अपने गुस्से को नहीं रोक पाता और अपने राज़ नहीं छुपा पाता, उसे कोई भी आसानी से हरा सकता है।