एक शांत गाँव में करी नाम का एक नेक इंसान रहता था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने और अच्छे काम करने के लिए तत्पर रहता था। एक दिन, उसका प्रिय मित्र सोमू एक बड़ी मुसीबत में उसके पास आया। सोमू की बेटी बीमार थी और उसे इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। करी उसकी मदद करने के लिए बिल्कुल तैयार था।
तभी उसकी पत्नी नीला ने एक कीमती सोने का हार खरीदने की जिद पकड़ ली। नीला के गुस्से से डरते हुए, करी ने सोमू की मदद को टाल दिया और वह सारा पैसा नीला को दे दिया। नीला तो खुश हो गई, लेकिन सोमू की हालत और बिगड़ गई। धीरे-धीरे करी के अन्य मित्र और समाज के लोग भी उससे मदद माँगने आए, लेकिन करी केवल नीला की इच्छाओं को पूरा करने में ही लगा रहा। इस चक्कर में वह न तो अपने दोस्तों का साथ दे पाया और न ही कोई पुण्य का काम कर सका। अंत में, करी को अपनी गलती का एहसास हुआ कि जीवन में संतुलन कितना जरूरी है।