नीलगिरी नाम के एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। अर्जुन मेहनती था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी। वह छिपकर शराब पीने लगा था। उसे लगता था कि जब तक वह अकेले में पीता है, किसी को पता नहीं चलेगा। वह अक्सर अपने छोटे भाई रवि से कहता, 'चिंता मत कर, यह मेरा एक छोटा सा राज है।'
एक दिन गाँव में बड़ा उत्सव था। अर्जुन उत्सव में शामिल होने के बजाय, एक बड़े बरगद के पेड़ के पीछे छिपकर अपनी इस आदत को पूरा करने लगा। नशे में होने के कारण वह अपना संतुलन खोने लगा और ज़ोर-ज़ोर से बातें करने लगा। पास में खेल रहे बच्चों ने उसे इस हालत में देख लिया।
अगली सुबह जब अर्जुन बाज़ार गया, तो उसने देखा कि गाँव के लोग उसे देखकर मुस्कुरा रहे हैं और आपस में कानाफूसी कर रहे हैं। उसका 'राज' अब पूरे गाँव में फैल चुका था। उसे समझ आ गया कि छिपकर किए गए काम कभी छिपते नहीं हैं और वे सम्मान को ठेस पहुँचाते हैं। उस दिन के बाद अर्जुन ने उस बुरी आदत को छोड़ दिया और एक ईमानदार जीवन जीने का संकल्प लिया।