एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक अपने माता-पिता के साथ रहता था। वह बहुत मेहनती था, लेकिन उसे जुए की एक बुरी लत लग गई थी। खेल शुरू में मनोरंजन के लिए था, लेकिन धीरे-धीरे यह उसकी आदत बन गया।
हारने के बाद पैसे वापस पाने के लालच में अर्जुन ने झूठ बोलना शुरू कर दिया। उसने अपनी माँ से कहा कि उसे पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए, लेकिन उन पैसों से वह जुआ खेलने लगा। उसने अपने पिता से भी कई झूठ बोले। इन झूठों ने उसके मन की सच्चाई और दूसरों के प्रति उसकी दयालुता को खत्म कर दिया। वह केवल जीतने के बारे में सोचने लगा।
एक दिन, जुए के चक्कर में उसने अपने परिवार की सारी जमा-पूंजी और ज़मीन भी गँवा दी। जब वह सड़क पर खड़ा था, तो उसे एहसास हुआ कि उसने केवल पैसा ही नहीं खोया, बल्कि अपना चरित्र और अपने माता-पिता का विश्वास भी खो दिया है। अपनी गलती पर पछताते हुए, उसने कसम खाई कि वह अब मेहनत की कमाई से जीवन बिताएगा और फिर से एक ईमानदार इंसान बनेगा।