एक शांत गाँव में अर्जुन अपने दादाजी के साथ रहता था। एक सुबह, अर्जुन का प्यारा पिल्ला, ब्रूनो, अचानक बीमार होकर सुस्त होकर बैठ गया। अर्जुन को बहुत दुख हुआ और वह रोने लगा। उसके दादाजी ने उसे पास बिठाया और कहा, 'बेटा, घबराओ मत। किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए चार चीज़ों का सही होना ज़रूरी है।'
सबसे पहले, ब्रूनो की बीमारी; वह था 'रोगी'। फिर, दादाजी ने डॉक्टर सैम्युअल को बुलाया; वे थे 'चिकित्सक'। डॉक्टर ने ब्रूनो की जाँच की और एक विशेष जड़ी-बूटी का नुस्खा दिया; वह थी 'दवा'। फिर रवि नाम का एक सहायक आया जिसने उस दवा को सही मात्रा में तैयार किया; वह था 'दवा बनाने वाला'।
डॉक्टर की सलाह, सहायक की मेहनत, सही दवा और अर्जुन की देखभाल—जब ये चारों मिले, तब ब्रूनो फिर से खेलने लगा। अर्जुन समझ गया कि जैसे एक इमारत को मजबूती के लिए स्तंभ चाहिए, वैसे ही ठीक होने के लिए इन चारों का होना ज़रूरी है।