एक शांत गाँव में सोमू और उसकी पत्नी मीना रहते थे। सोमू एक मेहनती किसान था, लेकिन उसकी एक कमी थी—जब भी कोई मुसीबत आती, वह घबरा जाता और जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेता। मीना बहुत ही धैर्यवान और समझदार महिला थी। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। फसलें सूख गईं। घबराकर सोमू ने कहा, 'हमें अपनी जमीन बेच देनी चाहिए और शहर चले जाना चाहिए!'
मीना ने उसका हाथ थाम लिया। 'सोमू, अगर हम अभी सब कुछ बेच देंगे, तो जब बारिश होगी तब हमारे पास खेती के लिए कुछ नहीं बचेगा। हमें धैर्य रखना होगा। हमारे पास जो अनाज बचा है, उसी से हम कुछ समय निकाल लेंगे।' मीना की समझदारी ने सोमू को शांत किया। कुछ महीनों बाद बारिश हुई और फसलें फिर से लहलहा उठीं। मीना की सूझबूझ की वजह से उनका परिवार बर्बाद होने से बच गया। सोमू समझ गया कि संकट के समय में परिवार को संभालने वाला एक समझदार साथी ही परिवार को ढहने से बचाता है।