एक घने और सुंदर जंगल में बहुत सारे जानवर मिल-जुलकर रहते थे। एक दिन, मोंटी नाम का एक बंदर पड़ोसी जंगल से वहाँ आया। मोंटी को अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था। वह जंगल के बीचों-बीच जाकर चिल्लाने लगा, "सुनो सब लोग! मेरे जंगल में सब मुझे राजा की तरह मानते हैं, क्योंकि मैं सबसे ऊँची छलांग लगा सकता हूँ!"
बंदर की बातें सुनकर जानवरों को उस पर शक हुआ। एक हिरण ने पूछा, "अगर तुम इतने ही बड़े खिलाड़ी हो, तो क्या तुम उस ऊँचे ताड़ के पेड़ की चोटी तक एक ही छलांग में पहुँच सकते हो?"
मोंटी ने अपनी शान दिखाने के लिए कहा, "हाँ, क्यों नहीं! मैं तुमसे भी ऊँचा कूद सकता हूँ!"
तभी वहाँ मौजूद चतुर लोमड़ी, ज़ोया ने मुस्कुराते हुए कहा, "मोंटी भाई, अगर तुम सच कह रहे हो, तो ज़रा उस सबसे ऊँचे पेड़ के सबसे ऊपर वाले पत्ते को छूकर दिखाओ। हम सब तुम्हारी यह अद्भुत कला देखने के लिए बहुत उत्सुक हैं!"
जब मोंटी ने उस ऊँचे पेड़ की ओर देखा, तो उसे समझ आ गया कि वह इतना ऊँचा नहीं कूद सकता। उसे डर लगा कि कहीं उसकी पोल न खुल जाए। अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से, मोंटी वहाँ से दुम दबाकर भाग गया। जंगल के जानवर उसकी झूठी बातों पर मुस्कुराने लगे।
Moral
झूठा घमंड करने वाले लोग अंत में शर्मिंदा ही होते हैं।