एक बड़े अनाज के गोदाम में चूहों का एक बड़ा झुंड रहता था। वे सारा अनाज खा जाते थे। इससे परेशान होकर किसान ने वहां एक तेज़ बिल्ली पाल ली। बिल्ली बहुत कोशिश करती, लेकिन चूहे दीवारों की दरारों में छिप जाते थे।
एक दोपहर, बिल्ली एक पेड़ की टहनी से उलटी लटक रही थी। एक युवा चूहे ने उसे देखा और चिल्लाया, "देखो! बिल्ली गिर गई है और वह मर गई है! अब हमें डरने की ज़रूरत नहीं है!"
यह सुनकर सभी चूहे अपने बिलों से बाहर निकल आए और नाचने-गाने लगे। तभी एक बूढ़े और समझदार चूहे ने उन्हें रोका, "रुको! दोस्तों, बिना पक्का जाने बाहर मत आओ। हो सकता है यह बिल्ली की कोई चाल हो!"
लेकिन युवा चूहों ने बूढ़े चूहे की बात नहीं मानी। उन्होंने कहा, "आप तो बस डरपोक हैं!" और वे बाहर दौड़ने लगे। बिल्ली मरी नहीं थी, वह बस सही मौके का इंतज़ार कर रही थी। जैसे ही चूहे खुले में आए, बिल्ली ने झपट्टा मारकर कई चूहों को पकड़ लिया। बूढ़ा चूहा सुरक्षित अपने बिल में रहा। चूहों को समझ आया कि जल्दबाजी और बड़ों की बात न मानना भारी पड़ सकता है।
Moral
बड़ों की सलाह को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।