एक बहुत ही घना और सुंदर जंगल था। उस जंगल के बीचों-बीच एक छोटी सी नदी बहती थी। नदी को पार करने के लिए जानवरों के पास एक छोटा सा लकड़ी का पुल था। वह पुल इतना संकरा था कि एक बार में केवल एक ही जानवर उस पर से गुज़र सकता था।
एक सुबह, सोमू नाम का एक बकरी का बच्चा पुल पार करने लगा। सोमू को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। उसी समय, नदी के दूसरी ओर से कपिलन नाम का एक दूसरा बकरी का बच्चा भी पुल पर चढ़ने लगा।
पुल के ठीक बीच में आकर दोनों का सामना हुआ। सोमू चिल्लाया, 'मैं पहले आया हूँ, इसलिए पहले मुझे जाने दो!' कपिलन ने भी हार नहीं मानी और कहा, 'नहीं, मुझे जल्दी है, तुम्हें पीछे हटना होगा!'
दोनों में से कोई भी एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। अपनी ताकत दिखाने के चक्कर में, दोनों ने अपने सींगों से एक-दूसरे को टक्कर मारना शुरू कर दिया। टक्कर के दौरान, उनके सींग आपस में बुरी तरह फंस गए। खुद को छुड़ाने की कोशिश में, दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे 'छपाक' से नदी के गहरे पानी में गिर गए।
नदी की लहरों ने उन्हें बहा दिया और वे काफी दूर जाकर किनारे पर मिले। भीगे हुए और थके हुए, उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उनकी ज़िद ने एक साधारण से रास्ते को मुसीबत में बदल दिया था।
Moral
बेवजह की ज़िद हमेशा नुकसान पहुँचाती है।