एक सुंदर फार्म में कबीलन नाम का एक शिकारी कुत्ता और रूबी नाम का एक मुर्गा पक्के दोस्त थे। एक दिन उन्होंने दुनिया घूमने का फैसला किया और लंबी यात्रा पर निकल पड़े। जंगल के रास्ते चलते हुए शाम हो गई और अंधेरा छा गया। रात बिताने के लिए उन्हें एक सुरक्षित जगह चाहिए थी। उन्हें एक विशाल बरगद का पेड़ मिला। रूबी पेड़ की एक ऊँची टहनी पर बैठ गया और कबीलन पेड़ के तने के पास एक सुरक्षित खोखली जगह में छिप गया।
अगली सुबह जब रूबी ने बांग दी, तो पास ही छिपे एक लोमड़ी ने उसकी आवाज़ सुनी। लोमड़ी ने सोचा, 'आज तो बढ़िया नाश्ता मिलेगा!' वह पेड़ के पास आई और मीठी आवाज़ में बोली, "ओह सुंदर पक्षी! हमारे जंगल में आपका स्वागत है। कृपया नीचे आ जाइए, हम दोस्त बनकर बातें करेंगे।"
रूबी समझ गया कि लोमड़ी उसे खाने का नाटक कर रही है। उसने चतुराई से कहा, "दोस्त, मैं नीचे नहीं आ सकता, लेकिन तुम्हारे ऊपर आने का एक आसान रास्ता है। पेड़ के पीछे एक छोटी सी सीढ़ी जैसी टहनी है, तुम वहाँ से आ सकते हो।"
लोमड़ी लालच में पेड़ के पीछे गई। जैसे ही वह मुड़ी, कबीलन ने उस पर हमला कर दिया और उसे डराकर भगा दिया। रूबी की बुद्धिमानी और कबीलन की वफादारी ने उन्हें बचा लिया। दोनों फिर से खुशी-खुशी अपनी यात्रा पर निकल पड़े।
Moral
चापलूसी करने वालों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।