एक घने जंगल के पास एक हरे-भरे मैदान में सोमू नाम का गधा शांति से घास चर रहा था। तभी एक भूखी लोमड़ी ने उसे अपना शिकार बनाने की योजना बनाई।
लोमड़ी दबे पाँव, घास के पीछे छिपते हुए सोमू की ओर बढ़ने लगी। जब सोमू को अहसास हुआ कि लोमड़ी बहुत करीब आ गई है, तो उसका दिल डर से तेजी से धड़कने लगा। वह जानती थी कि अगर वह भागने की कोशिश करेगी, तो लोमड़ी उसे आसानी से पकड़ लेगी।
सोमू ने तुरंत एक तरकीब सोची। वह भागने के बजाय, लंगड़ाकर और लड़खड़ाकर चलने लगी। यह देखकर लोमड़ी हैरान रह गई और उसने पूछा, "अरे सोमू! तुम इस तरह अजीब तरह से क्यों चल रही हो? क्या हुआ है?"
सोमू ने उदास चेहरा बनाकर कहा, "ओह लोमड़ी भाई, इस मैदान में बहुत सारे नुकीले कांटे हैं। अभी-अभी एक बड़ा कांटा मेरे पैर में चुभ गया है। दर्द इतना है कि मैं सीधा खड़ी भी नहीं हो पा रही हूँ। आप सावधान रहिएगा, अगर वे कांटे आपके मुँह में चुभ गए, तो बहुत दर्द होगा!"
कांटों के डर से लोमड़ी थोड़ा पीछे हट गई। सोमू ने आगे कहा, "लोमड़ी भाई, आप बहुत दयालु हैं। अगर आप मेरे पैर से वह एक कांटा निकाल दें, तो मैं फिर से ठीक से चल पाऊँगी। आप मेरे पीछे आ जाइए, जब मैं अपना पैर उठाऊँगी, तब आप वह कांटा निकाल दीजिएगा।"
भूख के कारण मूर्खता में आकर लोमड़ी सोमू के ठीक पीछे जाकर खड़ी हो गई। जैसे ही लोमड़ी ने पैर को करीब से देखने के लिए अपना मुँह नीचे किया, सोमू ने अपनी पूरी ताकत जुटाई और एक ज़ोरदार लात मारी।
"धप!" लोमड़ी हवा में उछलकर दूर जा गिरी। उस मौके का फायदा उठाकर सोमू तेज़ी से दौड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुँच गई। सोमू ने अपनी चतुराई से अपनी जान बचा ली।
Moral
मुसीबत के समय घबराने के बजाय बुद्धि से काम लेना चाहिए।