एक घने जंगल के किनारे, चट्टानों की एक बड़ी गुफा में भेड़ों का एक झुंड रहता था। उसी जंगल में एक शक्तिशाली बाघ रहता था। एक दिन, शिकार की तलाश में घूमते हुए बाघ की नज़र एक गाय पर पड़ी और वह उसके पीछे दौड़ने लगा।
डर के मारे गाय अपनी पूरी ताकत से भागी। तभी उसे चट्टानों के बीच एक बड़ा छेद दिखाई दिया, और वह तुरंत उसके अंदर छिप गई। उस गुफा में पहले से ही कई भेड़ें रहती थीं, जिनका नेतृत्व एक बड़े सींगों वाला मेढ़ा कर रहा था।
बाहर बाघ की दहाड़ सुनकर गाय चुपचाप एक कोने में खड़ी हो गई। लेकिन उस मेढ़े को गाय का वहां आना पसंद नहीं आया। उसने गाय को डराने के लिए अपने सींगों से उसे धक्का देना शुरू कर दिया। "तुम यहाँ नहीं रह सकती! अभी बाहर जाओ!" मेढ़ा चिल्लाया।
गाय ने शांति से कहा, "दोस्त, बाहर बहुत खतरा है। मैं बस अपनी जान बचाने आई हूँ। जब बाघ चला जाएगा, तब हम बात करेंगे।"
पर मेढ़ा नहीं माना और शोर मचाता रहा। शोर सुनकर बाघ गुफा के द्वार तक आ पहुँचा। मेढ़ा डर से कांपने लगा। तब गाय ने धीरे से कहा, "अगर तुम शोर मचाओगे, तो बाघ हम दोनों पर हमला कर देगा। कृपया शांत रहो।"
मेढ़े को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह चुप हो गया। बाघ के जाने के बाद, मेढ़े ने गाय से माफी मांगी। गाय के धैर्य ने मेढ़े की जान भी बचा ली।
Moral
दूसरों की मुसीबत का फायदा उठाना या उन्हें परेशान करना गलत है।