एक घने जंगल के किनारे, एक खरगोश बहुत ही साफ-सुथरे और सुंदर बिल में रहता था। उसे अपने घर को व्यवस्थित रखना बहुत पसंद था।
एक दिन, जब खरगोश भोजन की तलाश में बाहर गया था, एक शरारती गिलहरी उसके बिल में घुस आई। गिलहरी ने वहाँ बिखरी हुई टहनियों और पत्तियों को इधर-उधर फेंक दिया और बिल को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। जब खरगोश वापस आया, तो अपने घर की हालत देखकर उसे बहुत गुस्सा आया। उसने गिलहरी को डराना और भगाना शुरू कर दिया। गुस्से में गिलहरी ने भी खरगोश पर पलटवार किया। दोनों जंगल के बीचों-बीच जोर-जोर से लड़ने लगे।
तभी वहाँ से एक चालाक लोमड़ी गुजरी। लोमड़ी ने सोचा कि क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाए। उसने पास आकर कहा, "अरे भाइयों, तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो? तुम दोनों उस बड़े पेड़ के नीचे आकर बैठ जाओ। मैं एक न्यायप्रिय निर्णायक हूँ और मैं तुम्हारे झगड़े का फैसला कर दूँगा।"
खरगोश और गिलहरी ने लोमड़ी की बात मान ली और पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। लोमड़ी ने उन्हें घेर लिया। उसने कहा, "सबसे पहले, उस गिलहरी को सजा मिलनी चाहिए जिसने घर गंदा किया!" और इससे पहले कि गिलहरी कुछ समझ पाती, लोमड़ी ने उसे झपटकर खा लिया। खरगोश डर के मारे कांपने लगा। अगले ही पल लोमड़ी बोली, "और अब, उस खरगोश को सजा मिलनी चाहिए जिसने छोटी सी बात के लिए इतना शोर मचाकर मुझे परेशान किया!" और लोमड़ी ने खरगोश को भी खा लिया।
छोटी सी बात के लिए दूसरों के बीच पंचायत करने के चक्कर में, खरगोश और गिलहरी दोनों ने अपनी जान गँवा दी।
Moral
छोटे विवादों को सुलझाने के लिए गलत लोगों की मदद लेना जानलेवा हो सकता है।