एक सुंदर घाटी में तीन बकरी दोस्त रहते थे: पिप, एक नन्हा बच्चा; माइलो, एक मध्यम आकार की बकरी; और बार्नबी, एक शक्तिशाली बड़ा नर बकरा। एक दिन, उनके मैदान की सारी घास खत्म हो गई। ताजी घास खाने के लिए उन्हें एक नदी पर बने संकरे पुल को पार करना था।
लेकिन उस पुल के बीच में एक भूखा भालू रहता था। वह गरजते हुए कहता, 'कोई भी इस पुल को पार नहीं करेगा!' बार्नबी ने बहादुरी दिखाते हुए कहा, 'मैं ताकतवर हूँ, मैं उसे टक्कर मारकर दूर कर दूँगा!' लेकिन नन्हीं पिप ने कहा, 'अगर तुम उससे लड़ोगे, तो वह हम सब पर हमला कर देगा। हमें दिमाग से काम लेना होगा।'
तीनों ने मिलकर एक योजना बनाई। सबसे पहले छोटी पिप पुल पर चली। भालू दहाड़ा, 'रुको! मैं तुम्हें खा जाऊँगा!'
पिप ने मासूमियत से कहा, 'ओ महान भालू! मैं बहुत छोटी हूँ, मुझे खाकर आपका पेट नहीं भरेगा। मुझे जाने दो, मेरे पीछे और बड़ी बकरियाँ आएँगी, तब आपको बड़ा दावत मिलेगा!' लालची भालू ने सोचा कि बड़ी बकरी आएगी, तो उसने पिप को जाने दिया।
फिर माइलो आया। उसने भी वही तरकीब अपनाई और कहा कि बड़ी बकरियाँ पीछे आ रही हैं। भालू ने उसे भी जाने दिया। अंत में बार्नबी आया। भालू बहुत खुश था, उसने सोचा, 'अब असली दावत मिलेगी!'
जैसे ही बार्नबी पास पहुँचा, भालू उसे पकड़ने के लिए झपटा। लेकिन बार्नबी ने अपनी ताकत जुटाई, अपना सिर नीचे किया और पूरी शक्ति से भालू के पेट पर टक्कर मारी। भालू संभल नहीं पाया और धड़ाम से नदी में गिर गया। इससे पहले कि भालू बाहर आता, तीनों दोस्त सुरक्षित दूसरी तरफ पहुँच गए और मजे से ताजी घास खाने लगे।
Moral
ताकत से बड़ी बुद्धि होती है।