एक सुंदर से फार्म में रस्टी नाम का एक लाल मुर्गा रहता था। रस्टी बहुत मेहनती था और रोज़ सुबह खेत में दाने तलाशने निकलता था। एक सुबह, झाड़ियों के बीच उसे कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। जब वह पास गया, तो उसने देखा कि वह घर की मालकिन की एक कीमती सोने की बाली थी।
रस्टी ने जैसे ही उस बाली को अपनी चोंच में उठाया, वहीं पास में एक चालाक बिल्ली आ गई। बिल्ली ने चमकती बाली देखी और उसकी आँखें चमक उठीं। "रस्टी! क्या तुमने यह देखा?" बिल्ली ने लालच से कहा। "यह सोना बहुत कीमती है। अगर तुम इसे कहीं छिपाकर दे दो, तो तुम्हें ढेर सारा अनाज और मक्का मिल सकता है। तुम इतने अमीर बन सकते हो!"
रस्टी ने शांति से जवाब दिया, "दोस्त, तुम सही कह रही हो, लेकिन यह सोना मेरे किसी काम का नहीं है। मैं इस सोने से एक दाना अनाज भी नहीं खरीद सकता। हमारे मालिक जो हमें रोज़ प्यार से खाना खिलाते हैं, उनके प्रति ईमानदार रहना ही सबसे ज़रूरी है।"
रस्टी उस बाली को लेकर गया और धीरे से मालिक के पास रख दिया। अपनी खोई हुई बाली पाकर मालिक बहुत खुश हुए। रस्टी की ईमानदारी देखकर उन्होंने उसे ढेर सारा अच्छा दाना दिया और रहने के लिए एक सुंदर और आरामदायक नया घर भी बनाया। रस्टी अब बहुत खुशी से रहने लगा।
Moral
ईमानदारी ही सबसे बड़ी दौलत है।