एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक बूढ़ा किसान रहता था। उसके तीन बेटे थे। वे तीनों मेहनती तो थे, लेकिन उनमें एक बड़ी कमी थी—वे हमेशा आपस में लड़ते रहते थे। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने के कारण खेतों का काम भी ठीक से नहीं हो पाता था। सोमू अपने बेटों के इस व्यवहार से बहुत दुखी रहता था।
एक दिन सोमू ने उन्हें एकता का पाठ पढ़ाने का निश्चय किया। उसने तीनों बेटों को अपने पास बुलाया और उनके सामने लकड़ी की कुछ टहनियाँ रखीं।
पहली परीक्षा: सोमू ने प्रत्येक बेटे को एक-एक टहनी दी और कहा, 'इसे तोड़कर दिखाओ।' तीनों बेटों ने बड़ी आसानी से अपनी-अपनी टहनी को 'चटाक' की आवाज़ के साथ तोड़ दिया। उन्हें लगा कि यह तो बहुत ही आसान काम है।
दूसरी परीक्षा: अब सोमू ने कई टहनियों को एक साथ इकट्ठा किया और उन्हें एक मजबूत रस्सी से कसकर बांध दिया। उसने वह लकड़ियों का गट्ठर अपने सबसे बड़े बेटे को दिया और कहा, 'अब इस गट्ठर को तोड़कर दिखाओ।' बड़े बेटे ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन गट्ठर नहीं टूटा। दूसरे बेटे ने भी बहुत जोर लगाया, पर वह भी नाकाम रहा। छोटे बेटे ने भी कोशिश की, लेकिन लकड़ियों का वह समूह बहुत मजबूत था।
सोमू ने मुस्कुराते हुए कहा, 'मेरे बच्चों, जब ये टहनियाँ अलग-अलग थीं, तो इन्हें तोड़ना बहुत आसान था। लेकिन जब ये एक साथ बँध गईं, तो इन्हें तोड़ना नामुमकिन हो गया। तुम भी इन टहनियों की तरह हो। यदि तुम अलग-अलग रहकर लड़ते रहोगे, तो दुनिया तुम्हें आसानी से हरा देगी। लेकिन यदि तुम एक होकर रहोगे, तो कोई भी तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा।'
बेटों को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अपने पिता से माफी माँगी। उस दिन के बाद से उन्होंने लड़ना छोड़ दिया और मिलकर खेती करने लगे। जब वे तीनों मिलकर काम करने लगे, तो उनकी फसल बहुत अच्छी हुई और वे जल्द ही बहुत समृद्ध हो गए।
Moral
एकता में ही शक्ति है; मिलजुलकर रहने से हर मुश्किल आसान हो जाती है।