अवंती नाम के एक विशाल राज्य में राजा विक्रम शासन करते थे। उनके दरबार में वीर नाम का एक बहुत ही बुद्धिमान सलाहकार था। वीर की बुद्धिमानी के कारण राजा हमेशा सही निर्णय लेते थे, जिससे अन्य मंत्री उनसे जलने लगे और वीर को दरबार से हटाने की योजना बनाने लगे।
एक बार राजा विक्रम बहुत बीमार पड़ गए। ईर्ष्यालु मंत्रियों ने इस मौके का फायदा उठाने की सोची। उन्होंने राजवैद्य के माध्यम से राजा को एक दवा देने को कहा, लेकिन एक शर्त रखी: दवा को बैल के दूध के साथ मिलाकर पीना होगा। वे जानते थे कि बैल दूध नहीं देता, इसलिए वे चाहते थे कि राजा असंभव मांग करें और वीर को दोष मिले।
वैद्य ने राजा से कहा, 'महाराज, इस दवा को बैल के दूध के साथ मिलाकर लेना होगा।' राजा ने हैरान होकर पूछा, 'बैल का दूध कहाँ से आएगा?' वैद्य ने उत्तर दिया, 'यदि वीर यहाँ होते, तो वे निश्चित रूप से इसका प्रबंध कर देते।' जब राजा ने वीर को बुलाया और पूरी बात बताई, तो वीर तुरंत समझ गए कि यह एक साजिश है। उन्होंने घर जाकर अपनी चतुर बेटी माया को सब बताया।
माया ने एक उपाय सोचा। अगली सुबह, वह कपड़ों की एक बड़ी टोकरी लेकर महल के तालाब के पास पहुँची और कपड़े धोने लगी। शोर सुनकर राजा वहाँ आए और पूछा, 'बेटी, तुम इस समय कपड़े क्यों धो रही हो?'
माया ने बड़ी शांति से कहा, 'महाराज, मेरे पिता आज एक चमत्कार करने वाले हैं। वे एक बच्चे को जन्म देने वाले हैं, इसलिए मैं उनके कपड़े धो रही हूँ ताकि उत्सव की तैयारी हो सके।'
राजा हँसे और बोले, 'लेकिन बच्ची, बच्चे तो महिलाएँ जन्म देती हैं, पुरुष कैसे?'
माया ने मुस्कुराते हुए कहा, 'महाराज, जिस देश में राजा बैल का दूध माँगते हों, वहाँ पुरुषों का बच्चा पैदा करना कोई आश्चर्य की बात नहीं है!'
राजा को तुरंत अपनी गलती और मंत्रियों की साजिश समझ में आ गई। उन्होंने वीर की बुद्धिमानी की प्रशंसा की और माया को बहुत सारे उपहार दिए। जलने वाले मंत्री शर्मिंदा होकर रह गए।
Moral
बुद्धिमानी और सूझबूझ से किसी भी साजिश को हराया जा सकता है।